प्रमुख विपक्षी दलों एवं जन संगठनों ने प्रेस वार्ता की।
प्रमुख विपक्षी दलों एवं जन संगठनों ने प्रेस वार्ता की।
(बस्ती अधिनियम, मज़दूरों के अधिकारों एवं एलिवेटेड रोड पर आंदोलन का एलान किया।
उत्तराखंड (देहरादून) बुधवार, 27 मई 2026
आज देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रमुख विपक्षी दलों एवं जन संगठनों ने 2016 के मज़दूर बस्ती अधिनियम, मज़दूरों के अधिकारों एवं विनाशकारी प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के खिलाफ “बहुत हो गया गरीबों पर वार, इस बार हमें चाहिए अधिकार” के नाम से आंदोलन का एलान किया और पत्रकार हेम भट्ट के सात हुई दर्दनाक घटना की निंदा भी की। कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, चेतना आंदोलन, और सर्वोदय मंडल उत्तराखंड की और से वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब 2016 के अधिनियम द्वारा मलिन बस्तियों के सवाल का पूरा समाधान हो सकता है, दस साल बीतने के बाद भी वर्त्तमान सरकार इसपर एक भी कदम नहीं उठाया है। जो सरकार अपने ही कानून के विपरीत काम कर रही है, वह लोगों पर आरोप लगा रही है कि वह अवैध हैं। ऐसे ही सारे कानून की धज्जिया उड़ा कर विनाशकारी एलिवेटेड रोड परियोजना पर कार्यवाही को आगे बढ़ने का प्रयास जारी है जबकि उस परियोजना से शहर के निवासियों की जान के लिए खतरा होगा और जब लगभग रोज़ मसूरी रोड पर वैसे ही जाम हो रहे हैं। इसको प्रस्तावित परियोजना रद्द करने के बजाय राष्ट्रीय हारीत प्राधिकरण (NGT) के नाम से जनता को भ्रमित कर सरकार बस्तियों को हटाने का प्रयास कर रही है। यहाँ तक कि कुछ प्रभावित लोगों की याचिका के आधार पर कांठ बांग्ला बस्ती का ज़बरन विस्थापन पर उच्च न्यायालय को रोक लगाना पड़ा। इसके अतिरिक्त अब इस समय जब महंगाई एवं गैस की किल्लत से लोग तरस रहे हैं, और उनको सुरक्षा एवं सहायता की ज़रूरत है, निर्माण मज़दूर बोर्ड और सरकार के सारे तंत्र मज़दूरों को अपने अधिकार देने के बजाय उनको कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। दिहाड़ी मज़दूरों को मज़बूरन शहर को छोड़ना पड़ रहा है लेकिन निर्माण मज़दूर बोर्ड पंजीकृत यूनियन द्वारा कागज़ों से लेने से इंकार कर रहा है और ऐसे शर्तों को लागू किया है जिससे असली मज़दूर सारे लाभों से वंचित हो रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि इन सारे मुद्दों पर आंदोलन होगा जिसका पहली चरण शुरू हो गया है, शहर भर में जन सभाएं हो रही हैं। फिर 30 मई को बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति से जुलूस होगा। इसके बाद अलग अलग तरीकों द्वारा आंदोलन को और तेज किया जायेगा जब तक सरकार क़ानूनी प्रक्रिया शुरू कर बस्ती के निवासियों एवं मज़दूरों को अपना क़ानूनी हक़ नहीं देती है। मीठे मीठे आश्वासनों से जनता संतुष्ट नहीं होने वाला है, उनको अधिकार चाहिए।
पत्रकार हेम भट्ट की गैर क़ानूनी गिरफ़्तारी पर भी वक्ताओं ने आक्रोश जताया और उसकी ग़ौर निंदा की। आगामी दिनों पर इस मुद्दे को ले कर भी कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रेस वार्ता में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय शर्मा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता समर भंडारी, सर्वोदय मंडल के वरिष्ठ अधिवक्ता हरबीर सिंह कुशवाहा एवं चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल शामिल रहे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ सत्यनारायण सचान एवं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रवीण त्यागी ने भी समर्थन किया।