नई समय सारणी पर भड़के शिक्षक, पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग,शिक्षक संगठनों ने सीईओ को ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध। - Swastik Mail
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अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को मिली मंजूरी, फायर सेफ्टी ऑडिट होगा अनिवार्य।मानसून अवधि में आपदा तैयारी को लेकर राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने की समीक्षा।जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की देख में जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) से जिले में मौसम एवं आपदा संबंधी परिस्थितियों की लगातार निगरानी की जा रही है।उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल के नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने सचिव संस्कृति युगल किशोर पन्त के साथ वार्ता की। राशन कार्डधारकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना: जुलाई माह का खाद्यान्न 31 जुलाई तक अवश्य प्राप्त करें।

नई समय सारणी पर भड़के शिक्षक, पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग,शिक्षक संगठनों ने सीईओ को ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध।

 नई समय सारणी पर भड़के शिक्षक, पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग,शिक्षक संगठनों ने सीईओ को ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध।
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नई समय सारणी पर भड़के शिक्षक, पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग,शिक्षक संगठनों ने सीईओ को ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध।

(मौसम, दूरी और संसाधनों की कमी को बताया बड़ी समस्या)

उत्तराखंड (देहरादून) वीरवार, 09 अप्रैल 2026

प्रदेश में विद्यालयों की नई समय सारणी लागू किए जाने के विरोध में शिक्षक संगठन एकजुट हो गए हैं। विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल एवं जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) प्रेम लाल भारती से मुलाकात कर इस फैसले का विरोध जताते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की।

शिक्षकों का कहना है कि शासन द्वारा तय की गई नई समय सारणी प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। ग्रीष्मकाल में स्कूलों का समय सुबह 7:45 से दोपहर 2:05 बजे तक रखा गया है, जिसे उन्होंने अव्यवहारिक बताया। उनका कहना है कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच भीषण गर्मी रहती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कई विद्यालयों में बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी भी स्थिति को और कठिन बना सकती है।

शीतकालीन समय में सुबह 8:50 बजे स्कूल खोलने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चे दूरदराज के गांवों से, कई बार जंगलों के रास्ते स्कूल पहुंचते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा भी चिंता का विषय है। ठंड के मौसम में सुबह जल्दी निकलना बच्चों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि समय में बदलाव से मध्याह्न भोजन की व्यवस्था प्रभावित होगी, जिससे बच्चों को समय पर भोजन नहीं मिल पाएगा। इससे उनकी दिनचर्या और पढ़ाई दोनों प्रभावित होंगी।

शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने प्रशासन से जनपद की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पुरानी समय सारणी को ही लागू रखने की मांग की।

इस दौरान राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह रावत, जिला मंत्री रूपक पुरी, कोषाध्यक्ष योगेश गुप्ता, मधु पटवाल, कमल सुयाल, कुलदीप तोमर, सत्यजीत, शशांक शर्मा, NMOPS अध्यक्ष अनुराग चौहान,अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनिल नौटियाल, जिला मंत्री विजय पाल सजवाण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश डोबरियाल, उपाध्यक्ष महावीर सिंह मेहता, संयुक्त मंत्री गिरीश सेमवाल, राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुभाष झिल्डियाल, जिला मंत्री अर्जुन पंवार, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सूरज मंद्रवाल, जिला मंत्री अश्विनी कुमार भट्ट, जिला कोषाध्यक्ष सुरक्षा चौहान आदि उपस्थित रहे।

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