रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों के बीच “विरासत कला उत्सव” ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती नजर आई। - Swastik Mail
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रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों के बीच “विरासत कला उत्सव” ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती नजर आई।उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के मामलों मॆं सचिवालय मार्च किया।देहरादून में SMILE योजना के तहत टपकेश्वर मंदिर परिसर में चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया।जिला प्रशासन की ओटीपी आधार पर होमडिलिविरी व्यवस्था से एजेंसियों से छंटी भीड़।उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ रायपुर शाखा के अध्यक्ष अरविन्द सिंह सोलंकी के नेतृत्व में कार्यकारिणी ने उप शिक्षा अधिकारी हेमलता गौड़ उनियाल से मुलाकात की।

रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों के बीच “विरासत कला उत्सव” ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती नजर आई।

 रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों के बीच “विरासत कला उत्सव” ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती नजर आई।
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रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों के बीच “विरासत कला उत्सव” ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती नजर आई।

(लेखक गांव बना संस्कृति का संगम, विरासत कला उत्सव में दिखी एकता की झलक)

उत्तराखंड (देहरादून) बुधवार, 18 मार्च 2026

रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों के बीच “विरासत कला उत्सव” में बुधवार की सांस्कृतिक संध्या ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करती नजर आई। देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपने लोकनृत्यों के जरिए भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत संदेश प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम, त्रिपुरा, हरियाणा, राजस्थान एवं जम्मू से आए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो उठा।

सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ संतोष रामसहाय पांडे एवं उनके दल द्वारा बुंदेलखंड के प्रसिद्ध ‘राई’ नृत्य की प्रस्तुति से हुआ, जिसने दर्शकों को क्षेत्रीय संस्कृति से परिचित कराया। इसके पश्चात हिमांजली बरुआ एवं उनके साथी कलाकारों ने ढोल, पेपा और गोगोना जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर असम के बिहू नृत्य की सजीव प्रस्तुति देकर दर्शकों में उत्साह का संचार किया।

इसके बाद मनदीप सिंह एवं दल द्वारा पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के साथ डोगरी नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। वहीं, सुरेंद्र सिंह एवं उनके साथी कलाकारों ने फाग नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों से भरपूर तालियां बटोरीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. विजय धस्माना, अध्यक्ष, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय तथा विशिष्ट अतिथि हे.न. ब. गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला एवं निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुकशाल ‘गणी’ द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम के बीच में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संरक्षक डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ एवं राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि की गरिमामय उपस्थिति रही। इस अवसर पर डोईवाला नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के सचिव बालकृष्ण चमोली, डॉक्टर बेचैन कंडियाल सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे और सभी प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

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