जयपुर के सांगसिंह से भगवान रूठा, किए 11 दिन में 25 अंतिम संस्कार। - Swastik Mail
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अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को मिली मंजूरी, फायर सेफ्टी ऑडिट होगा अनिवार्य।मानसून अवधि में आपदा तैयारी को लेकर राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने की समीक्षा।जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की देख में जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) से जिले में मौसम एवं आपदा संबंधी परिस्थितियों की लगातार निगरानी की जा रही है।उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल के नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने सचिव संस्कृति युगल किशोर पन्त के साथ वार्ता की। राशन कार्डधारकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना: जुलाई माह का खाद्यान्न 31 जुलाई तक अवश्य प्राप्त करें।

जयपुर के सांगसिंह से भगवान रूठा, किए 11 दिन में 25 अंतिम संस्कार।

 जयपुर के सांगसिंह से भगवान रूठा, किए 11 दिन में 25 अंतिम संस्कार।
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जयपुर के सांगसिंह से भगवान रूठा, किए 11 दिन में 25 अंतिम संस्कार।

(श्मशान के चक्कर काटते थक चुका दूल्हे का भाई सांगसिंह, अब रो भी नहीं पाता)

राज्यस्थान (जयपुर) बुधवार, 22 दिसंबर 2022

जयपुर में हॉर्स राइडिंग का काम करने वाले सांगसिंह ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि घोडे के रफ्तार की तरह जिंदगी इतनी तेजी से घनघोर अंधेरे में चली जाएगी। सांगसिंह के छोटे भाई सुरेन्द्रसिंह की शादी 8 दिसम्बर को थी। बारात रवानगी के समय भुंगरा गांव में काल का ऐसा पगफेरा हुआ कि अब तक 35 जिंदगियां जा चुकी है। हादसे के बाद से दिलासा देने हर रोज अनगिनत लोग आ रहे हैं, लेकिन सांगसिंह सिर पर रखे कपड़े से एकटक देखता भर है। उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि प्रकृति ने उसके साथ ऐसा क्यों किया।

11 दिन में 25 अंतिम संस्कार भुंगरा गांव में पिछले 11 दिन में 25 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों के लिए जिंदगी का यह सबसे भयावह मंजर है। गांव के लोग भी अत्यंत व्यथित है। हादसे में अब तक 35 मौतें हो चुकी हैं। इनमें 10 मृतक अन्य गांवों के हैं।घर अब घर नहीं रहा, दीवारें काटने को दौड़ रहीं मेरिया रामसिंह नगर गांव का 13 वर्षीय रावलसिंह। उसके लिए घर अब घर नहीं रहा। घर की दीवारें काटने को दौड़ती है। घर में न रुठने वाला और न ही मनाने वाला। अब छोटे भाई लोकेन्द्र के साथ खेलना-कूदना भी कभी नहीं होगा। उसकी जिंदगी में न मां की डांट-फटकार होगी और न ही दुलार। रावल के पिता का पांच साल पहले देहांत हो गया था। गैस त्रासदी में मां जस्सूकंवर और छोटा भाई लोकेन्द्र उसे हमेशा के लिए छोड़ गए। अब रावल घर में अकेला रह गया। खेलने-कूदने की उम्र में उसकी जिंदगी में ऐसा तूफान आया कि सब कुछ बदल गया।

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